वन्य जीवन और प्रकृति मानव के अभिन्न अंग हैं

मानव सभ्यता प्रकृति और वन्य जीवन को जिस प्रकार से हानि पहुंचा रही हे शायद उसी का हिसाब कोविद-19 ले रहा हैं। एंडरसन (UN Environment Chief) के अनुसार मानवता प्राकृतिक दुनिया पर हानिकारक परिणामों के साथ बहुत सारे दबाव डाल रही है, एंडरसन ने चेतावनी दी कि ग्रह की देखभाल करने में विफल होने का मतलब है खुद की देखभाल नहीं करना।

अग्रणी वैज्ञानिकों के अनुसार

कोविद -19 का प्रकोप एक "स्पष्ट चेतावनी शॉट" था, वन्यजीवों में कहीं अधिक घातक बीमारियां मौजूद है, और आज की सभ्यता "आग से खेल रही है"। उन्होंने कहा कि यह लगभग हमेशा मानवीय व्यवहार था जो बीमारियों को मनुष्यों में फैलाने का कारण बना।

वैश्विक ताप और प्रकृति

आगे भविष्य में आने वाले प्रकोपों से बचने के लिए हमे आज वैश्विक ताप और प्रकृति के हनन को रोकना होगा वह भी युद्ध स्तर पर, क्यूंकि यह दोनों ही वन्यजीवों को मनुष्य के संपर्क में लाने का कारण बनते हैं। सभी देशो को अपने पशु बाजारों को भी समाप्त करने का कार्य मिलकर करना होगा।

जंगल छेत्रो के निरंतर कटाव

जंगल छेत्रो के निरंतर कटाव ने मानव को जानवरों और पोधो के बहुत अधिक निकट ला कर रख दिया है। और इस बढती निकटता के कारण जंगली जानवरों की बीमारियाँ मनुष्यों को अपना शिकार बना रही हे।

गत वर्षो में मानव संक्रामक रोग अपना प्रकोप धरती के चारो और दिखा चुके हें जैंसे बर्ड फ्लू, इबोला, सार्स, मर्स आदि। इस बात का भी पूर्वानुमान किया जा सकता है कि कोविद -19 से भी अधिक खतरनाक वायरस भविष्य में मानव के समक्ष एक नई चुनोती बनकर खड़े होंगे। परन्तु हम आज मानव समाज को जागरूक बना सकते हे या फिर भविष्य में मानव समाज को नई बीमारी का शिकार। आज हमारे पास साधन है और ताकत भी कल हमारे पास बस लाचारी होगी और उसका सबूत हे आज का कोविद – 19.

आज वन्य जीव तनाव में हे जिसके लिए हम अर्ताथ मनुष्य जिम्मेदार है। एक पल को सोचिये “तैयारी करने से हार और जीत दोनों में से एक तय है परन्तु बिना तैयारी के हार निश्चित है।“

न केवल दुनिया भर की सरकारे, स्वयं सेवी संस्थाए, कुछ गिने चुने वन्यजीव प्रेमी, और पर्यावरणविद् अपितु हर आम नागरिक को अपने अपने हिस्से का योगदान देना ही होगा। क्यूंकि इसका उपभोग केवल कुछ लोग नहीं वरन सभी मानव सभ्यता कर रही है। एक तरीके से आज हम केवल उपभोग न करते हुए पर्यावरण का भक्षण कर रहे है। जिम्मेदारी शब्द भले ही दिखने और समझने में कठिन लगता हो परन्तु इसका शुद्ध अर्थ केवल इतना है कि जो कुछ किया जा सके और जितना हो सके उतना किया जा सके।

एक अर्थ में मैं यहाँ इस बात पर भी प्रकाश डालना चाहता हूँ कि जितनी ज्यादा ताकत उतनी ज्यादा जिम्मेदारी। अपने मानव होने का परिचय दीजिये अपनी जिम्मेदारी में भी आनंद लीजिये।

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